Saturday, April 11, 2026

दिल ढूंढता हैं



जिसको सब कुछ मिल गया वो संत, महात्मा होता है. आम आदमी तो हमेशा कुछ न कुछ ढूंढता रेहता है...

सांसे चलती रेहती है, हम जिये जाते है
दिल ढूंढता रेहता हैं, बस चैन की एक सांस 

हर पल दौडते रहते है, किसी मंजिल को पाने 
दिल ढूंढता रेहता हैं, पलभर रुकने को ठिकाना 

अपने होते है पराये, अजनबी बनते है अपने
दिल ढूंढता रेहता हैं, एक रिश्ता जो रहे कायम

कुछ खो कर पाते है, कुछ पाकर खो जाता है
दिल ढूंढता रेहता हैं, क्या हाथों में है समाया

जिंदगी गुजर जाती है, जिसकी तलाश में हरदम 
दिल ढूंढता रेहता हैं वही, फुरसत के रात दिन

सुरेश नायर
मार्च २०२६

दिल ढूंढता हैं

जिसको सब कुछ मिल गया वो संत, महात्मा होता है. आम आदमी तो हमेशा कुछ न कुछ ढूंढता रेहता है... सांसे चलती रेहती है, हम जिये जाते है दिल ढूंढता ...