Thursday, October 17, 2013

नाट्यचक्र

मराठी नाटक 'नाट्यचक्र'

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नाट्यचक्र - प्रवेश १ व २

नाटकाचे शीर्षकगीत 




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जिसको सब कुछ मिल गया वो संत, महात्मा होता है. आम आदमी तो हमेशा कुछ न कुछ ढूंढता रेहता है... सांसे चलती रेहती है, हम जिये जाते है दिल ढूंढता ...