प्रीतम मोहे, तेरे बिना, जिया न लागे
आ मिल जा
क्यु मोसे झूठी आस बँधायी
प्रेम का क्यु मनमे दीप जलाया
आ मिल जा
अंगणात पारिजातकाचा सडा पडे, कधी फुले वेचायला येशील इकडे (When will you come, to pick the flowers from my garden)
जिसको सब कुछ मिल गया वो संत, महात्मा होता है. आम आदमी तो हमेशा कुछ न कुछ ढूंढता रेहता है... सांसे चलती रेहती है, हम जिये जाते है दिल ढूंढता ...
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